सदियों पुरानी काडू नदी पर कब्जे का आरोप, प्लाटिंग से बढ़ा बाढ़ का खतरा

सदियों पुरानी काडू नदी पर कब्जे का आरोप, प्लाटिंग से बढ़ा बाढ़ का खतरा
ग्रामीण बोले- तहसील और भूमाफियाओं की मिलीभगत से गायब कर दिया नदी का हिस्सा
बरेली, संवाददाता। तहसील सदर क्षेत्र के ग्राम लक्ष्मैयापुर में सदियों पुरानी काडू नदी की जमीन पर अवैध कब्जा कर प्लाटिंग किए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन और राजस्व कर्मियों पर भूमाफियाओं से मिलीभगत का आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि राजस्व अभिलेखों और मानचित्रों में हेरफेर कर नदी के हिस्से को ही गायब कर दिया गया।
ग्रामीणों के मुताबिक करीब 200 साल पुरानी काडू नदी पहले लगभग 20 मीटर चौड़ी थी, लेकिन अब नदी क्षेत्र को पाटकर मात्र पांच फुट चौड़ा नाला छोड़ दिया गया है। आरोप है कि नदी की बहुमूल्य भूमि पर अवैध रूप से प्लाटिंग कर करोड़ों रुपये का खेल किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में यह क्षेत्र भारी जलभराव और बाढ़ की चपेट में आ सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले छह महीने से तहसील सदर में लगातार शिकायतें की जा रही थीं। कई बार प्रशासनिक टीम गांव में पैमाइश के लिए भी पहुंची, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। आरोप है कि पैमाइश के दौरान भूमाफियाओं ने खुलेआम कहा कि “तहसील प्रशासन एक करोड़ रुपये लेकर शांत हो जाएगा।” इस कथित बयान के बाद प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मानचित्र से गायब किया गया नदी का हिस्सा
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि तहसील से जुड़े कुछ राजस्व कर्मियों और लेखपालों की मिलीभगत से नदी वाला भाग राजस्व मानचित्र से ही गायब कर दिया गया। इससे कब्जाधारियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर सरकारी भूमि को निजी प्लाटिंग में बदला जा रहा है।
धारा-67 की कार्रवाई पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों ने सरकारी भूमि पर कब्जों के मामलों में होने वाली धारा-67 की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रशासन कार्रवाई कर मामला न्यायालय में भेज देता है, जहां वर्षों तक केस लंबित रहता है। इसी दौरान कब्जाधारी पक्के निर्माण कर लेते हैं और सरकारी भूमि स्थायी कब्जे में चली जाती है। लोगों का आरोप है कि समय पर सही रिपोर्ट न लगने और कमजोर पैरवी के कारण कब्जों पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही।
तालाब, चकरोड और चारागाह भी कब्जे की जद में
ग्रामीणों के अनुसार तहसील सदर क्षेत्र में केवल नदी ही नहीं, बल्कि तालाब, ग्राम समाज, चकरोड, चारागाह, नवीन परती और बंजर भूमि पर भी बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे हो रहे हैं। शिकायतों के बावजूद कई मामलों में गलत रिपोर्ट लगाकर कब्जाधारियों को संरक्षण देने के आरोप लगते रहे हैं।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों, राजस्व कर्मियों और भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही नदी की मूल स्थिति बहाल कर अवैध प्लाटिंग पर रोक लगाने की मांग उठाई है।






