संपूर्ण समाधान दिवस में फिर उमड़ी फरियादियों की भीड़, फर्जी निस्तारण पर उठे सवाल
जनता दर्शन से लेकर मुख्यमंत्री पोर्टल तक भटक रहे शिकायतकर्ता, गुणवत्ता पूर्ण निस्तारण नहीं होने से बढ़ रही नाराजगी

बरेली। तहसील सदर में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस एक बार फिर आम जनता की समस्याओं और प्रशासनिक कार्यशैली पर सवालों का केंद्र बन गया। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित इस समाधान दिवस में बड़ी संख्या में पहुंचे फरियादियों ने अधिकारियों पर शिकायतों के फर्जी निस्तारण और लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए।
कई शिकायतकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने पूर्व में जनता दर्शन, तहसील दिवस, थाना समाधान दिवस और मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी अपनी समस्याएं दर्ज कराई थीं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा केवल कागजी कार्रवाई कर शिकायतों का निस्तारण दिखा दिया गया। वास्तविक समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं, जिसके चलते उन्हें बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
समाधान दिवस में पहुंचे बुजुर्गों, महिलाओं, किसानों और मजदूरों ने आरोप लगाया कि अधिकारी बिना मौके पर जांच किए ही रिपोर्ट लगा देते हैं। कई मामलों में शिकायतकर्ता को बिना जानकारी दिए शिकायत बंद कर दी जाती है। इसके कारण आम जनता का भरोसा प्रशासनिक व्यवस्था से उठता जा रहा है।

प्रदेश सरकार जहां आम जनमानस की समस्याओं के त्वरित और गुणवत्ता पूर्ण निस्तारण के लिए लगातार प्रयासरत है, वहीं कुछ प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी कई विभाग गलत रिपोर्ट प्रस्तुत कर शिकायतों का फर्जी निस्तारण कर देते हैं।
समाधान दिवस में यह भी चर्चा रही कि सरकारी तालाब, ग्राम समाज और सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जों की शिकायतों के बावजूद कई विभाग कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। कुछ मामलों में प्रशासनिक कर्मचारियों की मिलीभगत के आरोप भी लगाए गए। फरियादियों ने कहा कि भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी मजबूत हो चुकी हैं कि सरकारी संपत्तियां भी माफियाओं के कब्जे में जा रही हैं और जिम्मेदार अधिकारी मौन बने हुए हैं।
लोगों का कहना है कि जब विभागों में तैनात चपरासी और सुरक्षाकर्मी तक अपनी जमीन को कब्जा मुक्त नहीं करा पा रहे हैं, तो आम जनता को न्याय कैसे मिलेगा, यह बड़ा सवाल बनता जा रहा है।
हालांकि जिलाधिकारी द्वारा लगातार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने, वेतन रोकने और नोटिस जारी करने जैसी कार्रवाई की जा रही है, लेकिन फरियादियों का मानना है कि जब तक शिकायतों के गलत निस्तारण पर संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक जनता को राहत मिलना मुश्किल है।
समाधान दिवस में आए कई शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की कि शिकायतों का मौके पर जाकर निष्पक्ष सत्यापन कराया जाए और फर्जी रिपोर्ट लगाने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि आम जनता का विश्वास शासन-प्रशासन पर बना रह सके।






