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बरेली

16वें वित्त आयोग से नगर निगम को मिलेगी ज्यादा राशि, नगरीय विकास को मिलेगी रफ्तार

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बरेली।
नए वित्तीय वर्ष के साथ ही 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें लागू होने जा रही हैं, जिससे नगर निगमों की आर्थिक स्थिति पहले से अधिक मजबूत होने की उम्मीद है। अधिकारियों के मुताबिक, मौजूदा 15वें वित्त आयोग की तुलना में नगर निगम को लगभग 9 प्रतिशत अधिक धनराशि मिलने की संभावना है। यह राशि शहरी आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने में खर्च की जाएगी। नई किस्त अप्रैल से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष के बाद जारी की जाएगी।

नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार राज्यों के माध्यम से नगर निकायों को अनुदान के रूप में यह राशि उपलब्ध कराती है। 15वें वित्त आयोग के तहत स्थानीय निकाय निधि से शहरी निकायों को केवल 36 प्रतिशत हिस्सा मिलता था, जबकि 16वें वित्त आयोग में इसे बढ़ाकर 45 प्रतिशत कर दिया गया है। इस बदलाव का सीधा लाभ नगर निगम, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को मिलेगा।

उत्तर प्रदेश में 15वें वित्त आयोग के तहत नगर निकायों को लगभग 65 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष की राशि प्राप्त हो रही थी। वहीं, इस बार राज्य के लिए करीब 1.16 लाख करोड़ रुपये का कुल आवंटन प्रस्तावित किया गया है। इस अतिरिक्त धनराशि का उपयोग शहरों में सीवर और ड्रेनेज सिस्टम को सुदृढ़ करने, ठोस कचरा प्रबंधन में सुधार, सड़कों के चौड़ीकरण, स्ट्रीट लाइट व्यवस्था, पार्कों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के विकास में किया जाएगा।

इसके साथ ही यह राशि शहरों को हरित और स्वच्छ बनाने, नागरिक सुविधाओं के आधुनिकीकरण और नगरवासियों के जीवन स्तर में सुधार लाने में सहायक होगी।

परफॉर्मेंस के आधार पर मिलेगा अनुदान

16वें वित्त आयोग की एक अहम विशेषता यह है कि अब अनुदान केवल तयशुदा आवंटन के आधार पर नहीं, बल्कि नगर निगम के कार्य निष्पादन (Performance) के अनुसार दिया जाएगा। नए प्रावधानों के तहत समय पर ऑडिट कराना, टैक्स वसूली में सुधार, ऑनलाइन लेखा प्रणाली लागू करना और योजनाओं में धन का सही उपयोग जैसे मानकों के आधार पर अनुदान राशि तय की जाएगी।

नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि नए वित्तीय वर्ष में यह किस्त प्राप्त होगी, हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नगर निगम को कुल कितनी राशि मिलेगी। उन्होंने कहा कि किस्त जारी होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। नगर आयुक्त ने विश्वास जताया कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों से न केवल शहरों की आर्थिक और सामाजिक प्रगति को मजबूती मिलेगी, बल्कि स्थानीय निकायों को दीर्घकालिक सुधारों के लिए पर्याप्त संसाधन भी उपलब्ध होंगे।

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