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बरेली

बदायूं HPCL डबल मर्डर केस: SIT ने जुटाए साक्ष्य, 8 दिन में शासन को देगी रिपोर्ट

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Badaun में Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL) के दो अधिकारियों की हत्या के मामले में जांच तेज हो गई है। इस सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड की जांच के लिए गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग टीम (SIT) सोमवार शाम को घटनास्थल पर पहुंची और विस्तृत पड़ताल की।

जांच टीम ने सीबीजी प्लांट परिसर का निरीक्षण कर अहम साक्ष्य जुटाए और प्लांट से जुड़े अधिकारियों से घटना के संबंध में जानकारी ली। इसके बाद टीम संबंधित थाने पहुंची, जहां मुख्य आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की गई।

130 करोड़ की लागत से बना था CBG प्लांट

जानकारी के अनुसार Hindustan Petroleum Corporation Limited ने वर्ष 2024 में बदायूं के सैजनी गांव में लगभग 130 करोड़ रुपये की लागत से कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) प्लांट स्थापित किया था।

बीते गुरुवार को इसी प्लांट परिसर के अंदर उप महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता और सहायक मुख्य प्रबंधक हर्षित मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी।

आरोपी ने थाने में किया था समर्पण

घटना के बाद मुख्य आरोपी अजय प्रताप सिंह ने Musajhag Police Station में जाकर आत्मसमर्पण कर दिया था। फैक्ट्री परिसर के अंदर हुई इस दोहरे हत्याकांड की गूंज लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सुनाई दी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए Prime Minister’s Office ने भी इस घटना पर रिपोर्ट मांगी थी।

SIT का गठन

मामले की जांच के लिए Yogi Adityanath के निर्देश पर मंडलायुक्त भूपेंद्र एस. चौधरी की अध्यक्षता में SIT गठित की गई। जांच टीम में डीआईजी अजय कुमार साहनी और अपर आयुक्त खाद्य कामता प्रताप सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।

सोमवार को SIT टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद थाने पहुंचकर आरोपी अजय प्रताप सिंह के खिलाफ दर्ज पुराने मामलों की जानकारी भी ली।

डीआईजी Ajay Kumar Sahni ने बताया कि घटना से जुड़े सभी साक्ष्य एकत्र किए जा चुके हैं और संबंधित अधिकारियों व पुलिसकर्मियों से पूछताछ की गई है। जांच पूरी कर आठ दिनों के भीतर रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी।

आरोपी की सील दुकानों के शटर काटे गए

इस बीच मामले से जुड़ा एक और पहलू सामने आया है। हत्यारोपित अजय प्रताप सिंह ने गांव के बाहर अवैध रूप से छह दुकानें बनवा रखी थीं। प्रशासनिक टीम ने शनिवार को पैमाइश के बाद इन दुकानों को सील करते हुए ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किया था।

हालांकि रविवार रात को इन सील दुकानों के शटर काट लिए गए, जिसकी पुलिस को भनक तक नहीं लगी। आशंका जताई जा रही है कि आरोपी के साथियों ने दुकानों को गिराए जाने से पहले ही शटर हटवा दिए।

इस घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि इतने संवेदनशील मामले में भी सुरक्षा और निगरानी को लेकर लापरवाही सामने आई है।

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