Bareilly News : शराब का नाम ‘संगम’ रखने पर भड़का संत समाज, आंदोलन और अनशन की चेतावनी।

Bareilly News : शराब का नाम ‘संगम’ रखने पर भड़का संत समाज, आंदोलन और अनशन की चेतावनी।
धर्मगुरुओं ने जताई कड़ी आपत्ति, बोले- आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं।
बरेली। प्रयागराज के पवित्र त्रिवेणी संगम के नाम पर शराब का ब्रांड लॉन्च किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। संत समाज और धर्मगुरुओं ने इसे हिंदू आस्था का अपमान बताते हुए तीखा विरोध दर्ज कराया है। बरेली में धर्मगुरु पंडित सुशील पाठक ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
उन्होंने कहा कि “संगम” केवल एक नाम नहीं, बल्कि करोड़ों सनातन श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का केंद्र है। प्रयागराज स्थित त्रिवेणी संगम हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में शामिल है, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। ऐसे पवित्र नाम का इस्तेमाल शराब जैसे उत्पाद के लिए किया जाना बेहद आपत्तिजनक और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम है।
“हिंदू धर्म को बदनाम करने की साजिश”
पंडित सुशील पाठक ने आरोप लगाया कि यह कदम हिंदू धर्म और सनातन परंपराओं को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश जैसा प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि जिस डिस्टलरी कंपनी ने यह ब्रांड लॉन्च किया है, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने सरकार से मांग की कि संबंधित कंपनी का लाइसेंस निरस्त किया जाए और जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाकर कार्रवाई की जाए।
संत समाज में भारी नाराजगी
इस विवाद को लेकर संत समाज में भी भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। संगम पीठाधीश्वर शांडिल्य महाराज ने भी इस पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। पंडित सुशील पाठक ने कहा कि संत समाज इस मुद्दे पर पूरी तरह एकजुट है और किसी भी कीमत पर धार्मिक आस्था का अपमान स्वीकार नहीं किया जाएगा।
“सड़कों पर उतरेंगे साधु-संत”
धर्मगुरुओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही “संगम” नाम से शराब ब्रांड को वापस नहीं लिया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, तो साधु-संत सड़कों पर उतरकर आंदोलन और अनशन शुरू करेंगे।
उन्होंने कहा कि यह केवल एक ब्रांड नाम का विवाद नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं और सनातन संस्कृति के सम्मान का मामला है। न्याय मिलने तक विरोध जारी रहेगा।
सोशल मीडिया पर भी बढ़ा विरोध
मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। बड़ी संख्या में लोग पवित्र धार्मिक स्थलों और प्रतीकों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं संत समाज ने इसे धार्मिक मर्यादाओं के खिलाफ बताते हुए सरकार से सख्त नीति बनाने की मांग की है।
रिपोर्ट : देवेंद्र पटेल, बरेली






