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बरेली

कागजों से गायब होती किला नदी पर मानवाधिकार आयोग सख्त, भूमाफियाओं और कॉलोनाइजरों पर कस सकता है शिकंजा

बरेली में कभी शहर की पहचान रही किला नदी अब अपने अस्तित्व की आखिरी लड़ाई लड़ रही है

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बरेली में कभी शहर की पहचान रही किला नदी अब अपने अस्तित्व की आखिरी लड़ाई लड़ रही है। जमीन की बढ़ती भूख और जिम्मेदार विभागों की लापरवाही ने नदी को कई इलाकों में संकरे नाले में तब्दील कर दिया है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि कई स्थानों पर सरकारी अभिलेखों में ही नदी का अस्तित्व गायब मिलता है। अब इस पूरे मामले में मानवाधिकार आयोग की एंट्री के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
मानवाधिकार आयोग ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट
किला नदी की जमीन पर अवैध कब्जों, प्लॉटिंग और पक्के निर्माणों की शिकायतें मानवाधिकार आयोग तक पहुंचने के बाद आयोग ने नगर निगम और जिला प्रशासन से विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने साफ संकेत दिए हैं कि नदी की जमीन पर हुए अवैध कब्जों और प्रशासनिक लापरवाही की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक आयोग ने पूछा है कि आखिर नदी की भूमि पर कैसे आलीशान मकान, बाउंड्रीवॉल और व्यावसायिक निर्माण खड़े हो गए, जबकि जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय मौन बने रहे।
कई गांवों में नदी बनी संकरा नाला
तहसील सदर की राजस्व टीम द्वारा कराई गई पैमाइश और सीमांकन रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सुर्खा छावनी, वाकरनगर, सुंदरासी, महेशपुर अटरिया, रहपुरा चौधरी समेत करीब एक दर्जन गांवों में किला नदी का प्राकृतिक स्वरूप लगभग खत्म हो चुका है।
जिन क्षेत्रों में कभी नदी बहती थी, वहां अब उसकी चौड़ाई सिकुड़कर महज नाले जैसी रह गई है। सबसे गंभीर स्थिति सैदपुर हाकिंस और सुर्खा छावनी क्षेत्र में सामने आई, जहां सरकारी रिकॉर्ड में नदी का स्पष्ट उल्लेख तक नहीं मिला, जबकि मौके पर जलधारा मौजूद है।
नदी की जमीन पर खड़े हो गए आलीशान मकान
जांच के दौरान स्वालेनगर नवदिया और जसौली क्षेत्रों में नदी की भूमि पर बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण पाए गए। रिपोर्ट में गाटा संख्या 391 और 886-887 पर पक्के निर्माण दर्ज किए गए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि भूमाफियाओं और कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से वर्षों से नदी की जमीन पर कब्जे होते रहे और करोड़ों की जमीन का खेल चलता रहा। आरोप यह भी है कि जांच रिपोर्ट में प्रभावशाली लोगों के नाम जानबूझकर “अज्ञात” दर्शाए गए, ताकि कार्रवाई से बचाया जा सके।
प्रशासन पर बढ़ा दबाव
मामले के तूल पकड़ने के बाद नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। अधिशासी अभियंता राजीव कुमार राठी ने संपत्ति विभाग से संबंधित समस्त अभिलेख और रिपोर्ट एकत्र कर ली है, जिसे जल्द जिला प्रशासन को सौंपा जाएगा।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मानवाधिकार आयोग की सख्ती के बाद प्रशासन अवैध कब्जों पर बुलडोजर चलाता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
शहर की जलधारा पर संकट
विशेषज्ञों का मानना है कि नदियों के प्राकृतिक मार्ग पर अतिक्रमण केवल पर्यावरणीय संकट नहीं बल्कि भविष्य में बाढ़ और जलभराव जैसी बड़ी आपदाओं का कारण भी बन सकता है। किला नदी का सिकुड़ता अस्तित्व आने वाले समय में शहर के लिए गंभीर खतरे का संकेत माना जा रहा है।

रिपोर्ट: देवेंद्र पटेल, बरेली | LIVE BHARAT TV

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