मीट फैक्ट्री और पशुशाला के जहरीले पानी से त्रस्त ग्रामीण, संपूर्ण समाधान दिवस में फूटा लोगों का गुस्सा

मीट फैक्ट्री और पशुशाला के जहरीले पानी से त्रस्त ग्रामीण, संपूर्ण समाधान दिवस में फूटा लोगों का गुस्सा
“जांच के नाम पर सिर्फ आश्वासन, कार्रवाई अब तक शून्य”
बरेली। जनपद बरेली के ग्राम मोहनपुर, नकटिया, खिरिया निजावत खां, नरियावल, सैदपुर गुजरिया सहित आसपास के करीब 15 से 20 गांवों के ग्रामीण इन दिनों गंभीर जल एवं वायु प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं। आरोप है कि मारिया मीट फैक्ट्री एवं नगर निगम की पशुशाला से निकलने वाला खून, मांस के अवशेष, पशुओं का मल-मूत्र और जहरीला रासायनिक अपशिष्ट खुले नालों और नदी में छोड़ा जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र का वातावरण दूषित हो चुका है।
ग्रामीणों ने संपूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी से शिकायत करते हुए बताया कि फैक्ट्री से निकलने वाला दूषित पानी नालों के जरिए गांवों तक पहुंच रहा है। नालों में काला जहरीला झाग बन रहा है और पूरे इलाके में भयंकर दुर्गंध फैली रहती है। लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायतों के बावजूद अधिकारी केवल जांच के नाम पर “कार्रवाई का लॉलीपॉप” देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 60 से 70 हजार की आबादी इस प्रदूषण से प्रभावित है। क्षेत्र का भूजल और हैंडपंपों का पानी दूषित हो चुका है, जिसके कारण लोगों को मजबूरी में कैन और बोतलबंद पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। दूषित पानी के सेवन से गांवों में दाद-खुजली, डायरिया, सांस संबंधी रोग, किडनी की बीमारी, त्वचा रोग और गंभीर संक्रमण तेजी से बढ़ रहे हैं। लोगों ने कैंसर और ब्रेन हेमरेज जैसी गंभीर बीमारियों के मामलों में भी बढ़ोतरी का आरोप लगाया है।
बारिश के मौसम में हालात और अधिक भयावह हो जाते हैं। नाले ओवरफ्लो होकर गांव की गलियों और खेतों में गंदा पानी भर देते हैं, जिससे महामारी फैलने का खतरा लगातार बना रहता है। जलभराव के कारण मच्छरों और जहरीले कीटों का प्रकोप बढ़ रहा है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रदूषण नियंत्रण विभाग और संबंधित अधिकारी प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय मामले को टालने में लगे हैं। फैक्ट्री संचालकों द्वारा खुलेआम पर्यावरण नियमों की अनदेखी की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने से बच रहे हैं।
संपूर्ण समाधान दिवस में ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि नालों की तत्काल मशीनों से सफाई कराई जाए, मीट फैक्ट्री और पशुशाला से निकलने वाले दूषित अपशिष्ट को नालों में डालने पर रोक लगे, पानी की गुणवत्ता की जांच कराई जाए और स्वास्थ्य शिविर लगाकर ग्रामीणों का परीक्षण कराया जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो वह बड़ा जनआंदोलन करने को मजबूर होंगे।






