बरेली। टेक्निकल खामी से सहकारी समितियों में खाद वितरण प्रभावित, किसानों की बढ़ी परेशानी

उपनिबंधक सहकारिता ने किया भौतिक निरीक्षण, अधिकारियों से मांगी तकनीकी रिपोर्ट
रिपोर्ट: देवेंद्र पटेल | बरेली
बरेली। जनपद में सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को खाद वितरण में आ रही तकनीकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए उपनिबंधक एवं सहायक आयुक्त, सहकारिता बरेली अखिलेश कुमार सिंह ने मंगलवार को विकास खंड बिथरी चैनपुर स्थित बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति लिमिटेड बिथरी चैनपुर, भिड़ोलिया बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति लिमिटेड तथा कुआंडांडा बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति लिमिटेड का भौतिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने समितियों की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और मौके पर मौजूद किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं।
निरीक्षण के दौरान किसानों ने बताया कि ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट करने वाली मशीनों में लगातार तकनीकी खराबी आने से खाद वितरण बाधित हो रहा है। कई किसानों को खाद लेने के लिए एक-एक सप्ताह तक समितियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे किसान, मजदूर, बुजुर्ग और महिला कृषकों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उपनिबंधक अखिलेश कुमार सिंह ने संबंधित अधिकारियों से तकनीकी खामियों की विस्तृत जानकारी मांगी और कहा कि समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा ताकि जल्द समाधान कर किसानों को राहत दिलाई जा सके।
किसानों ने उठाई मैन्युअल व्यवस्था लागू करने की मांग
किसानों और किसान संगठनों का कहना है कि यदि ऑनलाइन प्रणाली में तकनीकी समस्या बनी रहती है तो इसका खामियाजा किसानों को नहीं भुगतना चाहिए। उनका कहना है कि मशीनों में खराबी सरकार या तकनीकी व्यवस्था की समस्या है, इसलिए जब तक सिस्टम पूरी तरह सुचारु नहीं हो जाता, तब तक मैन्युअल रिकॉर्ड के आधार पर खाद वितरण की वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
किसान नेताओं का कहना है कि खाद संकट का मुद्दा कई बार किसान दिवस और जिलाधिकारी बरेली के समक्ष भी उठाया जा चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर किसानों के साथ उचित व्यवहार नहीं किया जाता, जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ जाती हैं।
समय पर खाद उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती
कृषि प्रधान प्रदेश उत्तर प्रदेश में खरीफ सीजन के दौरान समय पर खाद उपलब्ध कराना किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। किसानों का कहना है कि यदि तकनीकी कारणों से खाद वितरण प्रभावित होता रहा तो फसलों की बुवाई और उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने मांग की कि सरकार तकनीकी खामियों का शीघ्र समाधान कराए तथा आवश्यक होने पर वैकल्पिक व्यवस्था लागू कर किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना सुनिश्चित करे।
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