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उत्तरप्रदेश

UPSC 2025: बरेली की सुरभि यादव ने हासिल की AIR 14, चौथे प्रयास में मिली बड़ी सफलता

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में बरेली की सुरभि यादव ने ऑल इंडिया रैंक 14 हासिल कर बड़ी सफलता पाई। जानिए उनकी तैयारी की रणनीति, परिवार का समर्थन और चार प्रयासों के संघर्ष की पूरी कहानी।

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बरेली: कड़ी मेहनत, अनुशासन और स्पष्ट लक्ष्य के बल पर बरेली की सुरभि यादव ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक 14 हासिल कर उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणादायक बन गई है।

सुरभि का मानना है कि सिविल सर्विसेज जैसी कठिन परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए धैर्य, निरंतर अभ्यास और सुव्यवस्थित रणनीति बेहद महत्वपूर्ण होती है। वर्षों की कड़ी मेहनत और अनुशासित दिनचर्या ने ही उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।

सुरभि यादव के पिता राकेश सिंह पुलिस विभाग में अधिकारी हैं और मूल रूप से अमरोहा जिले के नासिर नगला गांव के निवासी हैं। वर्ष 2008 में उनकी तैनाती बरेली में जीआरपी में हुई थी, जिसके बाद परिवार यहीं बस गया। सुरभि की माता अखिलेश गृहिणी हैं, जबकि उनके भाई राजशेखर यादव आईआईटी रुड़की से पढ़ाई करने के बाद एआई इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं।

सुरभि की शुरुआती शिक्षा बरेली में ही हुई। उन्होंने एसआर इंटरनेशनल स्कूल से दसवीं और आर्मी पब्लिक स्कूल से बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। बारहवीं कक्षा में उन्होंने 96 प्रतिशत अंक प्राप्त कर मंडल में शीर्ष स्थान हासिल किया था। इसके बाद वह उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली चली गईं।

उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से इतिहास (ऑनर्स) में स्नातक की पढ़ाई की और आगे जामिया मिलिया इस्लामिया से परास्नातक किया। इसी दौरान उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी।

सुरभि बताती हैं कि उनकी तैयारी की शुरुआत सिलेबस को गहराई से समझने से हुई। उन्होंने सबसे पहले एनसीईआरटी की किताबों से बुनियादी अवधारणाएं मजबूत कीं। इसके बाद उन्होंने रोजाना और मासिक अध्ययन योजना बनाकर उसी के अनुसार तैयारी जारी रखी।

दैनिक लक्ष्य तय करना और उसे हर हाल में पूरा करना उनकी दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा था। इसके साथ ही रोजाना अखबार पढ़ना और समसामयिक घटनाओं से जुड़े नोट्स तैयार करना भी उनकी तैयारी का अहम हिस्सा रहा।

उन्होंने यह भी बताया कि नियमित रूप से मॉक टेस्ट देने से उन्हें समय प्रबंधन और उत्तर लेखन की क्षमता सुधारने में काफी मदद मिली। सुरभि के अनुसार सिविल सेवा परीक्षा में केवल पढ़ाई ही नहीं बल्कि निरंतर अभ्यास, धैर्य और आत्मविश्वास भी उतने ही जरूरी होते हैं।

सुरभि अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने परिवार को देती हैं। खासतौर पर अपने पिता से उन्हें प्रेरणा मिली। पिता को पुलिस सेवा में समाज के लिए काम करते देख उनके मन में भी देश और समाज के लिए योगदान देने की भावना जागी।

उनका संदेश है कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं को असफलताओं से घबराना नहीं चाहिए। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और पूरी ईमानदारी से मेहनत की जाए तो सफलता अवश्य मिलती है।

चौथे प्रयास में मिली बड़ी सफलता

सुरभि यादव की इस सफलता के पीछे चार प्रयासों का लंबा संघर्ष छिपा है। अपने पहले प्रयास में वह प्रारंभिक परीक्षा भी पास नहीं कर सकीं। दूसरे प्रयास में उन्होंने प्रीलिम्स और मुख्य परीक्षा दोनों उत्तीर्ण कर लीं, लेकिन इंटरव्यू चरण में चयन नहीं हो सका।

तीसरे प्रयास में उन्हें फिर से प्रीलिम्स में सफलता नहीं मिली। लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी जारी रखी। आखिरकार चौथे प्रयास में उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 14 हासिल कर शानदार सफलता प्राप्त की।

सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है। बेटी की इस उपलब्धि से मां अखिलेश बेहद भावुक और गर्व महसूस कर रही हैं। उनका कहना है कि सुरभि ने शुरुआत से ही सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था और उसी के अनुरूप अपनी तैयारी करती रहती थी।

वहीं, दादा धर्म सिंह भी पोती की सफलता से बेहद खुश हैं। उन्होंने गांव में फोन कर सभी को मिठाई बांटने की बात कही। गांव के लोगों से बात करते हुए वे गर्व से कह रहे थे कि पोती की इस उपलब्धि पर पूरे गांव में जश्न मनाया जाएगा।

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